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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पिथौरागढ़ मास्टर प्लान पर अहम बैठक सम्पन्न

पांच नगरों के लिए विकास दृष्टि तय • क्षेत्रीय संपर्क, भू-विश्लेषण और SWOC पर विस्तृत प्रस्तुति

दीपक जोशी
पिथौरागढ़। जिलाधिकारी पिथौरागढ़ श्री आशीष भटगाँई की अध्यक्षता में आज जनपद के मास्टर प्लान तैयार किए जाने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पिथौरागढ़ जिले के पाँच शहरी स्थानीय निकायों—पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट, बेरीनाग और गंगोलीहाट—की वर्तमान स्थिति, विकास संभावनाएँ तथा भविष्य की दिशा पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक के दौरान स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल के विशेषज्ञों द्वारा पावर प्वाइंट प्रस्तुति (PPT) के माध्यम से जनपद की भौगोलिक, आर्थिक एवं विकास संबंधी संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।

प्रस्तुति में नगरों के लिए निम्नलिखित विज़न प्रस्तुत किए गए

बेरीनाग को “स्लो सिटी” एवं अवकाश–पर्यटन नगर के रूप में विकसित किया जाएगा।

गंगोलीहाट को धार्मिक पर्यटन नगर के रूप में उभारने की योजना।

धारचूला को सीमा व्यापार एवं बॉर्डर टूरिज्म मार्केट के रूप में विकसित किया जाएगा।

डीडीहाट को इको-टूरिज्म नगर के रूप में पहचान दी जाएगी।

पिथौरागढ़ को प्रशासनिक व संस्थागत केंद्र, आर्मी कैंटोनमेंट और MICE पर्यटन नगर के रूप में विकसित किया जाएगा।

बैठक में सड़क और वायु संपर्क पर भी विस्तृत जानकारी साझा की गई।

देहरादून, बागेश्वर, चंपावत और दिल्ली को जोड़ते हुए NH–109 और NH–09 प्रमुख संपर्क मार्ग बताए गए। पिथौरागढ़ का सबसे निकट हवाई अड्डा नैनी-सैनी एयरपोर्ट है।

प्रस्तुति में बताया गया कि डीडीहाट, बेरीनाग और पिथौरागढ़ में मध्यम जल निकासी घनत्व पाया गया, जहाँ पानी का संतुलित बहाव और बेहतर उपलब्धता दर्ज की गई। तकनीकी निष्कर्षों में जल संरक्षण योजनाओं, बाढ़–कटाव प्रबंधन और शहरी क्षेत्रों में सुविचारित ड्रेनेज प्लानिंग की आवश्यकता बताई गई।

बैठक में पांचों नगरों का परिचय भी दिया गया—
पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय और आर्थिक केंद्र है; धारचूला सीमा व्यापार और कैलाश मानसरोवर मार्ग के लिए प्रसिद्ध है; बेरीनाग चाय बागान और हिमालयी दृश्यों के लिए जाना जाता है; गंगोलीहाट महाकाली मंदिर के लिए प्रसिद्ध धार्मिक नगर है; डीडीहाट मनोहर हिमालयी दृश्य और मलायनाथ मंदिर के लिए जाना जाता है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मास्टर प्लान जनपद के सुनियोजित और दीर्घकालीन विकास का आधार होगा। उन्होंने सभी विभागों को सटीक डाटा, गुणवत्तापूर्ण योजना और समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

SWOC विश्लेषण में सामने आई प्रमुख बात

ताकतें: रणनीतिक स्थान, प्रशासनिक केंद्र, सांस्कृतिक पहचान, बेहतर सड़क–हवाई संपर्क

कमज़ोरियाँ: सीमित भूमि, कमजोर सीवरेज सिस्टम, कचरा निस्तारण की समस्या, पुराने भवन उपविधियाँ

अवसर: नए वाणिज्यिक क्षेत्र, उन्नत सड़क संपर्क, रोपवे–मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट गवर्नेंस

चुनौतियाँ: भूकंप व भूस्खलन जोखिम, पर्यटन दबाव, रियल एस्टेट लागत, विभागीय समन्वय की कमी

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ दीपक सैनी, अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह सहित सम्बंधित विभागों के अधिकारीयों ने प्रतिभाग किया।

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