
# लेगो एज्युकेशन कंप्यूटर साइंस और एआय और साइंस किट्स भारत में लॉन्च
नई दिल्ली: बच्चों को केवल एआय का उपयोग करना नहीं, बल्कि उसे बनाना सिखाने के उद्देश्य से, भारत में एसटीईएम शिक्षा के अग्रणी संगठनों में से एक रोबोजेनियस, लेगो एज्युकेशन कंप्यूटर साइंस और एआय और लेगो एज्युकेशन साइंस लर्निंग किट्स देशभर के स्कूलों तक ला रहा है। लेगो एज्युकेशन के रीसेलर के रूप में रोबोजेनियस, भारतीय स्कूलों में अगली पीढ़ी के कक्षा-अनुभव लाने वाले शुरुआती संगठनों में शामिल है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआय) जिस तेजी से काम और शिक्षा के भविष्य को बदल रही है, उससे भारतीय कक्षाओं के सामने एक बुनियादी प्रश्न खड़ा होता है: क्या बच्चे केवल एआय का उपभोग करेंगे, या वे इसे बनाना भी सीखेंगे? ‘‘बिल्ट टू बिल्ड एआय’’ विचार के तहत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बच्चों को एआय एप्लिकेशनों के इस्तेमाल से आगे ले जाकर सहयोगात्मक और व्यावहारिक शिक्षण के माध्यम से एआय को समझने, उस पर सवाल उठाने और उसे बनाने में सक्षम बनाना है।
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता अगली पीढ़ी के लिए एक बुनियादी साक्षरता बनती जा रही है। रोबोजेनियस में हमारा दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है—शिक्षा को निष्क्रिय अध्ययन से सक्रिय नवाचार में बदलना, क्योंकि हमारा मानना है कि विद्यार्थियों को केवल दुनिया के बारे में नहीं सीखना चाहिए, बल्कि उसे आकार देने के लिए तैयार होना चाहिए। वास्तविक अवसर बच्चों को एआय टूल्स का उपयोग करना सिखाने में नहीं, बल्कि उन्हें यह समझने में मदद करने में है कि एआय कैसे काम करता है, उसके बारे में आलोचनात्मक रूप से कैसे सोचना है और उसका जिम्मेदारी से निर्माण कैसे करना है,” रोबोजेनियस की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. शबनम शर्मा ने कहा।
इस दृष्टिकोण को समर्थन देने के लिए रोबोजेनियस साझेदार स्कूलों के साथ एआय वर्कशॉप, कक्षा प्रदर्शन, शिक्षक सहभागिता कार्यक्रम और सहयोगात्मक शिक्षण आयोजन भी करेगा। इनके माध्यम से शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को यह प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा कि रचनात्मक और व्यावहारिक शिक्षण के जरिए एआय कैसे पढ़ाया जा सकता है। यह पहल भारतभर के IB स्कूलों तथा A और A+ श्रेणी के सीबीएसई स्कूलों पर केंद्रित होगी। प्रारंभिक चरण में दिल्ली एनसीआर , मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और वडोदरा सहित प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसके बाद इसका विस्तार देशभर में किया जाएगा। रोबोजेनियस का लक्ष्य मार्च 2027 तक 100 से अधिक स्कूलों के साथ साझेदारी करना है।
नया लॉन्च किया गया लेगो एज्युकेशन कंप्यूटर साइंस और एआय समाधान प्राथमिक कक्षाओं से ही विद्यार्थियों को परिचित लेगो निर्माण अनुभवों के माध्यम से कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और एआय की मूल अवधारणाओं से परिचित कराता है। छोटे समूहों में मिलकर काम करते हुए विद्यार्थी सीखते हैं कि इंटेलिजेंट सिस्टम कैसे डिजाइन, परीक्षण और बेहतर किए जाते हैं। साथ ही वे सुरक्षित, आयु-उपयुक्त वातावरण में जिम्मेदार एआय पद्धतियों को समझते हैं, जहां विद्यार्थियों की गोपनीयता को प्राथमिकता दी जाती है। इसके पूरक के रूप में लेगो एज्युकेशन साइंस समाधान पाठ्यक्रम-संगत, व्यावहारिक विज्ञान शिक्षण अनुभव प्रदान करता है, जो जिज्ञासा, प्रयोग और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान को प्रोत्साहित करता है। दोनों प्लेटफॉर्म मिलकर एसटीईएम और एआय शिक्षा को मजबूत करने की इच्छुक स्कूलों के लिए एक आकर्षक शिक्षण मार्ग तैयार करते हैं।
“हमारा मिशन हमेशा स्कूलों में नई तकनीक लाने से कहीं बड़ा रहा है। हम दुनिया भर में हर विद्यार्थी को सफल होने में सक्षम बनाना चाहते हैं। हमारे समाधान विद्यार्थियों को जोड़ने और शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए तैयार किए गए हैं तथा वे कक्षा और संवर्धित शिक्षण के मानकों एवं पाठ्यक्रम के अनुरूप हैं। अपने स्थानीय रीसेलर्स के माध्यम से हम शिक्षण क्षमता, पाठ्यक्रम, शिक्षाशास्त्र और निरंतर सहयोग प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा सकते हैं। तकनीक तभी प्रभावी होती है, जब उसे एक मजबूत शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र में समाहित किया जाए,” लेगो एज्युकेशन इंटरनॅशनल के प्रमुख श्री टॉम हॉल ने कहा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर चर्चा बढ़ने के साथ, अभिभावक और शिक्षक ऐसे शिक्षण वातावरण की तलाश कर रहे हैं जो नवाचार के साथ सुरक्षा और नैतिकता का संतुलन बनाए रखे। रोबोजेनियस का मानना है कि जिम्मेदार एआय शिक्षा कम उम्र से शुरू होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थी उभरती तकनीकों के निष्क्रिय उपयोगकर्ता बनने के बजाय विचारशील निर्माता बन सकें।
कंपनी को उम्मीद है कि नए शिक्षण समाधान स्कूलों को विद्यार्थियों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, रचनात्मकता, सहयोग, नैतिक विवेक और समस्या-समाधान जैसे महत्वपूर्ण भविष्य-कौशल विकसित करने में मदद करेंगे—ये क्षमताएं भविष्य के कार्यबल के लिए लगातार अधिक आवश्यक मानी जा रही हैं।
भारत के डिजिटल परिवर्तन और एआय तत्परता पर राष्ट्रीय फोकस को तेज करने के बीच, “‘‘बिल्ट टू बिल्ड एआय’’ पहल का उद्देश्य ऐसे नए शिक्षार्थियों को प्रेरित करना है जो एआय -संचालित दुनिया में केवल रास्ता तलाशने के बजाय उसे आकार देने में सक्षम हों।



