
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के गाँधी भवन और राष्ट्रीय सैनिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्र की एकता,अखंडता,देशभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय चेतना को समर्पित विशेष व्याख्यान ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ का सफल एवं महत्वपूर्ण आयोजन गाँधी भवन के प्रांगण में किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलिजेज एवं चेयरमैन गाँधी भवन प्रो. बलराम पाणि जी रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वीर चक्र से सम्मानित कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी की अध्यक्षता रही।कार्यक्रम के मुख्य संयोजक प्रो. केपी सिंह,अध्यक्ष,पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग एवं निदेशक,गांधी भवन,दिल्ली विश्वविद्यालय रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और गांधी भवन में हस्तनिर्मित सूत की माला से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ।
कार्यक्रम के उद्घाटन वक्तव्य में प्रो.सिंह जी ने कहा कि ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ केवल एक विचार या अभियान नहीं,बल्कि भारत की विविध भाषाओं, संस्कृतियों,परंपराओं,क्षेत्रों और समुदायों को एक राष्ट्रीय भावना में जोड़ने का संकल्प है।उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे देश की उपलब्धियों,स्वतंत्रता सेनानियों और सीमा पर राष्ट्र की रक्षा करने वाले जवानों के योगदान को समझें।अपने जीवन में राष्ट्रहित,अनुशासन,जिम्मेदारी और सामाजिक समरसता के मूल्यों को अपनाएं।प्रो.सिंह ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा और शोध का केंद्र नहीं,बल्कि सामाजिक एवं राष्ट्रीय चेतना के निर्माण का भी महत्वपूर्ण मंच है।गांधी भवन महात्मा गांधी के विचारों—सत्य, अहिंसा, शांति, सद्भाव, समानता और सामाजिक समरसता—को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ विद्यार्थियों को राष्ट्र और समाज के प्रति उनके दायित्वों से जोड़ने के लिए निरंतर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।कार्यक्रम में प्रो. सिंह ने युवाओं,विशेषकर जेन-जी की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया।उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य आज के युवाओं के हाथों में है।युवाओं में ऊर्जा,नवीन सोच,तकनीकी दक्षता और परिवर्तन की क्षमता है;यदि इन गुणों को अच्छे संस्कार, अनुशासन,समय के सम्मान,कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम से जोड़ा जाए,तो यही युवा भारत को एक सशक्त,समृद्ध और श्रेष्ठ राष्ट्र बनाने में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वीर चक्र से सम्मानित कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने के लिए देश की विविध भाषाओं,संस्कृतियों,परंपराओं और क्षेत्रों के प्रति सम्मान तथा आपसी भाईचारा आवश्यक है। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता है। सामाजिक समरसता, पारस्परिक सम्मान और सहयोग की भावना को बढ़ावा देकर युवा समाज में एकता और सद्भाव का वातावरण निर्मित कर सकते हैं।कर्नल पाल ने यह भी संदेश दिया गया कि राष्ट्र निर्माण केवल यह सोचने से नहीं होगा कि देश हमें क्या दे सकता है,बल्कि हमें यह विचार विकसित करना होगा कि हम देश को क्या दे सकते हैं।
मुख्य अतिथि प्रो.बलराम पाणि ने विश्वविद्यालय समुदाय के लिए ऐसे कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की विविधता को समझना और उसका सम्मान करना ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का आधार है।उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जीवन से भी सक्रिय रूप से जुड़ें।प्रो.पाणि जी ने ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति से नहीं बनेगा,बल्कि इसके लिए शिक्षित,संस्कारित, जिम्मेदार,आत्मनिर्भर और संवेदनशील नागरिकों का निर्माण भी आवश्यक है। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करेगा,तभी भारत को एक विकसित और श्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।
आयोजन में ब्रिगेडियर विनिपिन चक्रवर्ती,उर्वशी वालिया, वेद प्रकाश,सुनील बंसल, कर्नल मुकेश त्यागी,उषा राणा,सुधीर त्यागी,राजीव खोसला आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



