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इंडिया स्पेस कांग्रेस 2026 का भव्य शुभारंभ, 25 देशों के 700 से अधिक प्रतिनिधि अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य को आकार देने के लिए हुए एकजुट

राष्ट्र प्रथम न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली: भारत के प्रमुख अंतरिक्ष उद्योग सम्मेलन इंडिया स्पेस कांग्रेस (ISC) 2026 के पांचवें संस्करण का आज नई दिल्ली में भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में 25 देशों के 700 से अधिक प्रतिनिधियों तथा 55 से अधिक भागीदारों एवं सहयोगी संगठनों ने भाग लिया। यह आयोजन क्षेत्र में वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक माना जा रहा है।

सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों, निवेशकों, रक्षा विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि अंतरिक्ष क्षेत्र का भविष्य विश्वसनीय साझेदारियों, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैश्विक सहयोग पर आधारित होगा।

स्पेस इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SIA-India) के अध्यक्ष डॉ. सुब्बा राव पावुलुरी ने कहा, “वैश्विक अंतरिक्ष परिदृश्य की पुनर्कल्पना, सहयोग के नए मॉडल विकसित करना और अंतरिक्ष के अगले युग को साकार करना अलग-अलग लक्ष्य नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े हुए अनिवार्य उद्देश्य हैं। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्थाएं अंतरिक्ष आधारित सेवाओं पर अधिक निर्भर होती जा रही हैं, अंतरिक्ष को महत्वपूर्ण अवसंरचना के रूप में देखा जाना चाहिए। भविष्य उन्हीं का होगा जो सुरक्षित, सुदृढ़ और टिकाऊ अंतरिक्ष क्षमताओं के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करेंगे।”

सम्मेलन के पहले दिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के भविष्य की आधारशिला बताया गया। भारत-थाईलैंड, भारत-ताइवान, भारत-कनाडा और भारत-फिलीपींस सहयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
थाईलैंड की अंतरिक्ष एजेंसी GISTDA के उप-कार्यकारी निदेशक फी चूसरी ने कहा, “थाईलैंड एक खुले और वैश्विक रूप से जुड़े अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। भारत और थाईलैंड के उद्योग जगत के बीच मजबूत सहयोग नई व्यावसायिक संभावनाओं के द्वार खोल सकता है और क्षेत्रीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है।”

भारत में ताइपे आर्थिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के प्रतिनिधि डॉ. मुमिन चेन ने कहा, “अंतरिक्ष क्षेत्र की अगली विकास यात्रा केवल आत्मनिर्भरता से संचालित नहीं होगी, बल्कि ऐसी रणनीतिक साझेदारियों से आगे बढ़ेगी जो प्रौद्योगिकी, नवाचार, प्रतिभा और विनिर्माण की पूरक क्षमताओं को एक साथ जोड़ती हों। भारत और ताइवान के बीच सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”
सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उन्नत विश्लेषण, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, अर्थ ऑब्जर्वेशन और अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग किस प्रकार अंतरिक्ष क्षेत्र को केवल अवसंरचना निर्माण से आगे बढ़ाकर बुद्धिमत्ता-आधारित सेवाओं में बदल रही है।

राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान (NIAS) के निदेशक एवं पूर्व पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. शैलेश नायक ने कहा,
“भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का वास्तविक मूल्य अंतरिक्ष से प्राप्त विशाल डेटा को उपयोगी और क्रियान्वयन योग्य जानकारी में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगा, जो सतत विकास, सुशासन, आर्थिक प्रगति और सामाजिक प्रभाव को नई दिशा दे सके।”

विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल विभाजन को समाप्त करने और देश के अंतिम व्यक्ति तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए स्थलीय और गैर-स्थलीय नेटवर्क का समन्वय आवश्यक होगा। सैटेलाइट संचार और डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाएं दूरस्थ, ग्रामीण और आपदा प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सम्मेलन में अंतरिक्ष अवसंरचना की सुरक्षा और मजबूती पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सरकारों, रक्षा प्रतिष्ठानों, वित्तीय संस्थानों और महत्वपूर्ण सेवाओं की बढ़ती निर्भरता अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों पर है।
उद्घाटन दिवस पर तीन महत्वपूर्ण रिपोर्टों का विमोचन किया गया— “कनेक्टिंग द अनकनेक्टेड: डायरेक्ट-टू-डिवाइस सैटेलाइट सेवाओं के लिए भारत के नियामक ढांचे की रूपरेखा”,
“स्पेस को ‘सक्षम बनाने वाली परत’ से ‘महत्वपूर्ण अवसंरचना’ के रूप में पुनर्परिभाषित करना”,
“स्पेस, स्ट्रेटेजी एंड द फ्यूचर वर्ल्ड ऑर्डर – डेफसैट 2026 के दृष्टिकोण” । इन रिपोर्टों में सैटेलाइट कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा तथा अंतरिक्ष क्षेत्र की भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

सम्मेलन के दौरान “जियोनीति – इंडिया स्पेस पॉलिसी आइडियाथॉन” का शुभारंभ भी किया गया। यह अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक नीति, सुशासन, सतत विकास और नवाचार को जोड़ते हुए भविष्य के अंतरिक्ष नीति विशेषज्ञों और नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करना है।

पहले दिन का समापन इंडिया स्पेस कांग्रेस एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 के साथ हुआ, जिसमें अंतरिक्ष क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले संगठनों और पेशेवरों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार स्पेस स्टार्टअप ऑफ द ईयर, स्पेस टेक्नोलॉजी एवं नवाचार, उभरते नेतृत्व और महिला अंतरिक्ष अग्रदूत जैसी श्रेणियों में प्रदान किए गए।
इंडिया स्पेस कांग्रेस 2026 के आगामी सत्रों में होने वाली चर्चाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का अगला अध्याय किसी एक देश या संस्था की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि राष्ट्रों, उद्योगों, नवोन्मेषकों और संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारियों से लिखा जाएगा, जो एक सुरक्षित, सुदृढ़ और समृद्ध अंतरिक्ष भविष्य का निर्माण करेंगे।

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