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रिलायंस-HSIIDC SEZ ज़मीन मामले से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता और उन्हें सार्वजनिक करने की मांग

रिलायंस एच एस आई आई डी सी - एस ई जैड भूमि मामले में दस्तावेज़ सार्वजनिक करने की माँग

नई दिल्ली: ‘वर्ल्ड काउंसिल ऑन कॉस्मिक राइट्स एंड यूनिवर्सल जस्टिस’ से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता सरदार चरणजीत सिंह ने हरियाणा सरकार और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि वे रिलायंस-HSIIDC स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) प्रोजेक्ट और उससे जुड़ी ज़मीन के सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेज़ों में पारदर्शिता सुनिश्चित करें और कानून के अनुसार उन्हें सार्वजनिक करें।

आज यहाँ आयोजित समय तथा सम्मेलन में सरदार चरणजीत सिंह एवं वरिष्ठ वकील बलराज मालिक ने कहा कि यह मामला जनहित से जुड़े अहम मुद्दों से संबंधित है, जिसमें ज़मीन का अधिग्रहण, ज़मीन का ट्रांसफर और इस्तेमाल, जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट, सरकारी मंज़ूरी और फ़ैसले, और प्रोजेक्ट से जुड़ी लगभग 7200 एकड़ ज़मीन की मौजूदा कानूनी स्थिति, मालिकाना हक और अधिकार शामिल हैं।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जब कोई जानकारी किसी सरकारी प्राधिकरण के पास हो और ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005’ के तहत उसे सार्वजनिक किया जा सकता हो, तो नागरिकों को कानून में बताई गई छूट और अन्य प्रावधानों के अधीन ऐसे रिकॉर्ड तक पहुँचने का अधिकार है। इसलिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस मामले से जुड़ी सभी लंबित RTI अर्जियों पर कानून के अनुसार और तय समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करें और फ़ैसला लें।
सरदार चरणजीत सिंह ने कहा कि अगर ज़मीन के अधिग्रहण, ट्रांसफर और बाद के लेन-देन, साथ ही SEZ प्रोजेक्ट से जुड़े जॉइंट वेंचर समझौतों और अन्य सरकारी कार्यों को लागू कानूनों, नियमों, मंज़ूरियों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया गया है, तो कानूनी रूप से सार्वजनिक किए जा सकने वाले सभी रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने से व्यापक जनहित सधेंगे और इस मामले से जुड़े संदेह या गलतफहमियां दूर करने में मदद मिलेगी।
वकील बलराज मालिक ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के दबाव में सरकारी विभाग काम कर रहे हैं उनका यह भी आरोप था कि आर टी आई विभाग और न्यायपालिका भी पूरी तरह से केंद्र सरकार के दबाव में हैं
सरदार चरणजीत सिंह व बलराज मलिक ने हरियाणा सरकार और HSIIDC से मांग की कि वे कानून के दायरे में रहते हुए संबंधित रिकॉर्ड को सार्वजनिक करें,
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चरणजीत सिंह ने साफ़ किया कि इस मांग को किसी पार्टी-विशेष की राजनीति या किसी व्यक्ति, कंपनी, संस्था या सरकारी अधिकारी पर गड़बड़ी के आरोप के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह मांग कानून के मुताबिक पारदर्शिता, जवाबदेही और जानकारी पाने के अधिकार के लिए है।
सरदार चरणजीत सिंह ने आगे कहा कि अगर सरकारी रिकॉर्ड की जाँच में कोई बड़ी गड़बड़ी या अनसुलझा कानूनी मुद्दा सामने आता है, तो संबंधित अधिकारी कानून के मुताबिक स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा पर विचार कर सकते हैं ताकि असल और कानूनी स्थिति को पूरी तरह से साफ़ किया जा सके।

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